Stress Management

स्ट्रेस मैनेजमेंट सूत्र जीवन : सहज, सरल, आनंदमय या तनावपूर्ण

इस आलेख का विषय सीधा आपसे और आपके प्रिय जनों से जुड़ा हुआ है। निश्चय ही हम सभी सहज और सरल जीवन चाहते हैं। पर हमारे दैनिक जीवन में आने वाले तनाव हमें सहज और सरल नहीं बने रहने देते। ऐसे में कुछ मूल बिंदुओं पर अवश्य विचार करना चाहिए।

  1. जीवन है तो परेशानियां आएंगी ही।
  2. दुनिया में आप अकेले ही नहीं हैं, जो परेशान हैं।
  3. कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जिन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता।
  4. इस जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है, यह परिस्थितियां भी कुछ समय के बाद आपके प्रयत्नों से अथवा अपने आप ही नियंत्रण में आ जाएंगी।

मुश्किल समय में अगर आप ऐसा कुछ पढ़ रहे हैं तो पहले स्वयं को बधाई दीजिए कि आप भाग्यवान हैं। फिर इन  बिंदुओं पर स्थिर मन से सोच भी पा रहे हैं, तो निश्चित मानिए कि आप अपने मुश्किल समय में भी आनंद ढूंढ लेंगे। इस तरह मुश्किल समय में भी हमारे पास यह चुनने का अवसर होता है कि हमें बुरा ही बुरा सोचकर पैनिक होना है या परिस्थितियों का सही आकलन कर सही रास्ते पर आगे बढ़ना है। कुल मिलाकर आप बुरे हो सकते हैं या बेहतर। 

आपके पास तमाम तरह की परेशानियां हो सकती हैं जैसे व्यापार की समस्या, आर्थिक समस्या, भावनात्मक अकेलापन, स्वास्थ्य की समस्या, पारिवारिक और ऐसी ही बहुत सारी अन्य समस्याएं। पर एक बार ठहर कर सोचें कि क्या आपका तनाव वास्तव में असली है? क्या इस समय कोई भी काम, व्यापार, शौक जैसे संगीत या व्यायाम, मित्रों या अपनों से बातचीत या भूतकाल में की गई ऐसी किसी गतिविधि की याद आपको सुकून नहीं देती? 

वास्तव में हमारी नियमित जिंदगी में हो रही हमारी कंडीशनिंग और खुद से अपेक्षाओं के दबाव ने हमें तनाव लेने का आदी बना दिया है। इससे बचने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण एवं मनोवैज्ञानिक और पर रखा हुआ सूत्र है ‘स्वीकार’। अपनी क्षमताओं स्थितियों एवं परिस्थितियों के स्वीकार से आप जीवन में आई हुई बहुत सारी कठिनाइयों को सहज में ही लेना सीख जाते हैं। अपने अनुभव किया होगा कि जीवन के अधिकांश तनाव आपको बाहर के वातावरण से मिलते हैं। यह छोटा सा शब्द आपको अपने अंतर्जगत से जोड़ देता है। इसलिए आइए, स्वीकार करना प्रारंभ करें। व्यक्ति और उनकी प्रकृति को, संबंधों और उनकी प्रगाढ़ता को साथ ही स्वयं की शक्ति एवं सीमाओं को भी।

मुश्किल समय भी कई बार नए अवसर लेकर आते हैं। कई बार हम अपनी कमजोरियों के पास जाकर अपनी ताकत को तलाशते और उसे पहचानते हैं। विश्व के कई बड़े आविष्कार एवं व्यापार मुश्किल समयों की ही देन हैं। दया, ईमानदारी, मानवीय मूल्यों में विश्वास, जूझने की क्षमता, प्रेम एवं मित्रता जैसे गुणों के मोती ढूंढने वाले मुश्किलों के सागर में से भी ढूंढ ही लाते हैं। 

इसके लिए आपको करना क्या है, बस खुद को एक स्वतंत्र और नया मौका देना है। खुद को पहले से बेहतर बनने  का अवसर देने में कोई कंजूसी मत कीजिए। अपने आप को यह संतोष होने का मौका दीजिए कि आपने खुद को कभी खुद पर भी इन्वेस्ट किया था। यकीन मानिए कि अगर यह इन्वेस्टमेंट आपने समझदारी और दृढ़ निश्चय से किया तो भविष्य में ऑफिस निवेश का बेहतरीन रिटर्न या प्रतिफल पाएंगे।

एक बात और, तनाव को हटाकर स्वयं को सहज सरल एवं बेहतर बनाने का इस लघु लेख के बिंदु आपकी केवल इस कोरोना के मुश्किल समय में ही सहायता नहीं करते बल्कि ये मुश्किल एवं तनाव के हर वक्त में आपको रीअरेंज एवं रीबूट करने में सहायता करते हैं।

आइए इन बिंदुओं को एक बार फिर से देख लें।

  1. स्वीकार। ऊपर दिए गए स्वीकार के सूत्रों का पालन करें।
  2. शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्। यानी मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी अपने शरीर को नजरअंदाज ना करें। दिन का कुछ समय व्यायाम – योग के लिए जरूर रखें ताकि आप शरीर और मन से स्थिर एवं मजबूत हो सकें।
  3. आपका पूरा जीवन एक एक करके कई दिनों का संकलन है। निरर्थक तनाव में इन्हें बर्बाद ना करें। अच्छी किताबें पढ़ें। खुश हो जाइए कि अभी भी आप ऐसा ही एक लेख पढ़ रहे हैं।
  4. अच्छा एवं मधुर संगीत सुनें। गाने का शौक हो तो गुनगुनाएं। नाच सकते हों तो जरूर नाचें। सच कहूं तो इसका अर्थ है कि आता हो तो सबके साथ और अगर नहीं आता हो तो अकेले ही कमरे में खुद के साथ नाचें। 
  5. मेहनती लोग कई बार खुद के प्रति बहुत अनुदार हो जाते हैं। कभी-कभी कोई अच्छी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या आपके पसंदीदा वीडियो देखना आपके रूटीन को तोड़ कल आपको सहज या रिलैक्स करता है।
  6. नये शौक विकसित करें। 
  7. प्रकृति एवं हरियाली से अपना संबंध कुछ ना कुछ समय के लिए अवश्य जोड़ें। आसमान के बदलते रंगों को देखें। लड़के प्रत्येक पत्ते के अलग रंग को अनुभव करने जैसी छोटी-छोटी कोशिशों में आनंद ढूंढें।
  8. जानकारी एवं अवसरों के प्रति चैतन्य रहें। लोगों से बात करते रहें। इंटरनेट का सार्थक उपयोग करें।
  9. पुराने मित्रों एवं रिश्तेदारों से बीच-बीच में बात कर लें।
  10. अत्यधिक अपेक्षाएं ना खुद से रखें ना अपनों और दुनिया से। 
  11. धन का उपयोग संसाधन पाने में ही है। इसलिए उतने ही धन का वास्तव में महत्व है जितने संसाधनों की आपको आवश्यकता है। साथ ही ध्यान रखें कि धन आपका हो सकता है परंतु संसाधन पूरी दुनिया के हैं। इसलिए उनके इस्तेमाल में सावधानी रखें। जीवन जीने को थोड़ा सा ही चाहिए होता है, आप की जीवन शैली ही महंगी हो जाती है।
  12. ध्यान रखें कि आप इस दुनिया में हमेशा के लिए नहीं हैं। अपने आज को बेकार की चिंताओं में बर्बाद ना करें।

तनाव से बचने के लिए इसके अतिरिक्त कुछ चीजों से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

  1. अत्यधिक और बेकार सूचनाओं से जो अखबारों न्यूज़ चैनलों यूट्यूब एवं फेसबुक के माध्यम से आपकी जिंदगी को नकारात्मक तौर पर प्रभावित करती है।
  2. अगर आप यूट्यूब, या ऐसे ही किसी अन्य एप्लीकेशन, वेबसाइट या किसी अन्य मीडियम पर वीडियो देखने में बहुत सारा समय अनचाहे ही खर्च कर देते हैं  तो अच्छा है कि इससे बचने के लिए आप ऑडियो फ़ाइलें जो पॉडकास्ट के नाम से आजकल खूब लोकप्रिय हैं, उनका का उपयोग करें।
  3. बेवजह बहस से बचिए।
  4. समस्याएं जितनी है उतनी ही बताइए। बेवजह  नकारात्मकता और चिंताएं मत फैलाइए।
  5. आपके सिस्टम, समाज और नीतियों में बुराइयां ढूंढने की जगह मदद करने के लिए आगे आइए।
  6. संसाधनों को इकट्ठा करने की होड़ में मत पड़िए। महामारी के समय आप किसी जरूरतमंद की जिंदगी को भी दांव पर लगा रहे हो सकते हैं।
  7. विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए नियमों का पालन करें। बिना डॉक्टर की सलाह के टैस्ट जैसे सिटी स्कैन आदि ना कराएं। यह जीत पर ही नहीं सेहत पर भी महंगे पड़ेंगे।

अंत में: मुश्किलों में रास्ता निकालने वाले बनें। सुरक्षित रहें। परिस्थिति के अनुसार अपने जीवन को ढालें। विश्वास रखें।

खुद को अपने एक नए वर्जन के लिए तैयार करें और रिबूट कर दें।

Author:
Dr. Gaurav Agarwal
Naturopathist (NDDY)
Head, Faculty of Arts,
Podar international College
Jaipur

 

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